सियासी घमासान के बीच गलवान शहीद के पिता को कोर्ट से जमानत, SC/ST एक्ट में हुई थी गिरफ्तारी

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पटना

गलवान में शहीद जयकिशोर सिंह के पिता राज कपूर सिंह को कोर्ट से जमानत मिल गई है। पुलिस ने उन्हें एस-एसटी एक्ट में गिरफ्तार किया। इससे पहले बिहार के वैशाली जिले के जंदाहा में गलवान घाटी में शहीद पिता के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार और गिरफ्तारी पर सियासी घमासान मचा रहा। परिजनों का आरोप है कि शहीद के पिता को पुलिस ने घसीटकर जीप में बिठाया और थाने में ले जाकर पीटा भी। विवाद शहीद जवान की याद में बनाए गए एक स्मारक से जुड़ा है जिसको लेकर गांव के कुछ दलितों ने रास्ता रोकने का आरोप लगाया। शहीद के पिता पर गांव के ही एक दलित ने एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज कराया था जिस सिलसिले में उनकी गिरफ्तारी हुई है।

बुधवार को नहीं हो पाई थी बेल
इस पूरे मामले पर बिहार विधानसभा में विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और सरकार पर शहीदों के अपमान का आरोप मढ़ दिया। इस मामले पर नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा की मंत्री विजय चौधरी से तीखी नोंकझोंक भी हो गई थी। बुधवार को भी शहीद के पिता की बेल नहीं हो पाई थी। हाजीपुर व्यवहार न्यायालय में जज की तबीयत खराब होने की वजह से अगला डेट दी गई थी।

वहीं शहीद पिता के केस के सिलसिले में कोर्ट पहुंचे शहीद के भाई नंदकिशोर कुमार ने बताया कि उनके पास साक्ष्य है, जिसमें अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी का सिग्नेचर है। जिसमें लिखा गया है कि जमीन सरकारी है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें एफआईआर के बारे में भी पुलिस के द्वारा नहीं बताया गया। नंदकिशोर ने आगे कहा कि डीएसपी साहब आए थे बोले कि 15 दिन का समय देती हूं मूर्ति हटा लीजिए, नहीं तो मूर्ति उठाकर पोखर में फेंक देंगे. लेकिन उन्होंने भी एफआइआर की बात नहीं बताई।

प्रतिमा लगाने को लेकर विवाद
वैशाली जिले के जंदाहा इलाके में सेना के जवान जय किशोर सिंह की शहादत के बाद उनके परिवार ने घर के सामने सरकारी जमीन पर शहीद की मूर्ति लगाकर स्माकर बनाया था। बताया जाता है कि जब स्मारक बना तो उस कार्यक्रम में कई सरकारी अधिकारी भी शामिल हुए थे। इस स्मारक को लेकर गांव के कुछ दलितों का आरोप है कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया गया है और दीवार डाल देने से उनके आने-जाने का रास्ता बंद हो गया है। गांव के अंदर चल रहे इस विवाद में ही शहीद के पिता राज कपूर सिंह पर हरिनाथ राम ने केस किया था।

बताया जाता है कि सरकारी जमीन पर स्मारक बनाने के बाद हरिनाथ राम के आने-जाने का रास्ता बंद हो गया था और जब ये स्मारक बना था तब राम और शहीद के परिवार के बीच सहमति बनी थी कि उसे इसके बदले में घर बनाने के लिए एक जमीन दी जाएगी। हरिनाथ राम ने इस करार के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है। शहीद के परिवार का कहना है कि जब स्मारक बना तो सरकारी अधिकारी कार्यक्रम में आए थे और अब पुलिस कह रही है कि 15 दिन के अंदर स्मारक हटा लो।

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