October 4, 2022

करमटिया में सोने की खदान से बदलेगी जमुई समेत इलाके की सूरत, हजारों रोजगार मिलेंगे

जमुई

देश के सर्वाधिक 44 प्रतिशत सोना के अपने भूगर्भ मे छिपाये करमटिया जल्द ही सोनो ही नहीं बल्कि प्रदेश की सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा। यहां सोना की खुदाई शुरू होने के बाद सुरक्षा और सुदृढ़ होगी, सड़कें अच्छी होंगी, नयी कॉलोनियां बसेगी, व्यवसाय का अवसर बढ़ेगा तो रोजगार भी बढ़ेगा। ऐसे में अशिक्षा और बेरोजगारी के कारण नक्सल की राह पकड़ने वाले युवा भी नक्सल की राह छोड़कर रोजगार के जरिये मुख्यधारा में शामिल होंगे। जिले के समाजशास्त्रियों का यह स्पष्ट मत है।

बता दें कि क्षेत्र में अशिक्षा, बेरोजगारी, पिछड़ेपन की वजह से कई युवा रास्ता भटक जाते हैं। सोना की खुदाई शुरू होने के बाद जब रोजगार मिलेगा, राह भटक चुके युवा स्वत: मुख्यधारा से जुड़कर देश के विकास में अपनी सहभागिता देंगे। पांच दिन पहले खान व भूतत्व विभाग की प्रधान सचिव ने संकेत दिया था कि यहां खुदाई का काम जल्द शुरू कराने के प्रयास हो रहे हैं।

1982 में चर्चा में आया क्षेत्र
सोनो की निर्जन व बंजर भूमि अक्टूबर 1982 में अचानक उस समय सुर्खियों में आयी जब स्थानीय स्वर्णकारों के पास इलाके के चरवाहे सोना बेचने के लिए रोजाना पहुंचने लगे। यह सिलसिला महीनों तक चला। धीरे धीरे इसकी भनक स्थानीय प्रशासन को लगी। स्थानीय प्रशासन को सूचना मिलते ही पुष्टि के बाद वरीय अधिकारियों को सूचित करते हुए स्थानीय प्रशासन ने करमटिया के उस भूभाग को सुरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया जहां से सोना मिलने की बात कही जा रही थी।

इसके बाद कई वर्षों तक भूगर्भवेत्ताओं द्वारा भूछेदन कार्य कर भूगर्भ में छिपे सोना का सर्वे किया गया। सर्वे रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया कि सरकारी मानक के अनुसार दो ग्राम के लिए सोना प्रति टन मिट्टी की उपलब्धता होनी चाहिये जबकि इस सर्वे में डेढ़ ग्राम प्रति टन सोना पाया गया जो कि सरकारी मानक से कम था। इस सर्वे रिपोर्ट के बाद करमटिया सोना खान की फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गयी थी।

लोकसभा में खनन मंत्री ने उठाया मामला
करमटिया एक बार तब फिर सुर्खियों में आया जब लोकसभा में खनन मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यह जानकारी दी कि देश के कुल स्वर्ण भंडार का 44 प्रतिशत सोना सोनो के करमटिया के भूगर्भ में छिपा है। खनन मंत्री के इस खुलासे के बाद पिछले दिनों बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी करमटिया को लेकर एक बड़ी घोषणा कर क्षेत्र के लोगों को उम्मीद की किरण दिखाई।

2002 में सोना खान से खुदाई की उम्मीदें जगी थी
वर्ष 2002 में सोना की खुदाई की संभावना जगी थी जब तत्कालीन केंद्रीय खनन मंत्री रामविलास पासवान  अप्रैल 2002 में करमटिया के हवाई सर्वेक्षण के बाद भूतत्ववेत्ताओ की एक टीम के साथ सोनो पहुंचे थे। उन्होंने करमटिया को स्वर्णमटिया घोषित कर खुदाई का काम शुरू करने को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की थी लेकिन उसके बाद फिर यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

पहले इलाके में नही जाते थे लोग
आज से पांच-सात वर्ष पूर्व  करमटिया में नक्सली गतिविधियां अधिक थी। इस कारण लोग उस इलाके में जाने से लोग परहेज करते थे। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा व्यवस्था चुस्त दुरुस्त होने के कारण इस इलाके में नक्सली गतिविधियां कम हुई हैं। अब लोग वहां तक जब चाहते हैं पहुंच जाते हैं।

कहते हैं समाजशास्त्री
समाजशास्त्री प्रोफ़ेसर रंजीता कुमारी ने बताया कि जिले के सोनो क्षेत्र में सोना मिलने से इस क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा। इससे संबंधित उद्योग धंधे लगेंगे जिससे यहां के बेरोजगार युवक-युवतियों का पलायन कम होगा। क्षेत्र के साथ-साथ राज्य का भी आर्थिक विकास होगा। बाहर से कई कंपनियां इस कार्य के लिए यहां आएंगी जिससे यहां के लोगों का रोजगार बढ़े़गा।

सोना खनन होने के बाद यह जिले के प्रमुख उद्योग के रूप में जाना जाएगा। साथ ही पूरे देश में दुनिया में जमुई जिले की पहचान बढ़ेगी और कई तरह के रोजगार भी यहां के लोगों को उपलब्ध होंगे जो अभी नहीं दिख रहे हैं। इससे भटके युवाओं को को मुख्य धारा में लौटने का अवसर मिलेगा जिससे क्षेत्र में अपराध, नक्सलवाद जैसी समस्याएं धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।

वहीं चुरहैत निवासी समाजशास्त्री कामदेव सिंह का कहना है कि कारमटिया में अगर सरकार सोना खनन शुरू करती है तो रोजगार व स्वरोजगार की असीम संभावनाओं के द्वार खुल जाएंगे। क्षेत्र की आबादी को एक ओर जहां सोना के खनन कार्य में रोजगार की संभावनाएं दिख रही हैं वहीं इसमें काम करनेवाले कर्मियों की सुख-सुविधा और दैनिक आवश्यकताओं की सामग्री के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा आदि की पूर्ति के लिए बाजार के विस्तार की संभावना भी दिख रही है। बाजार के विस्तार से आम व खास सभी को रोजगार के अवसर मिलेंगे। सड़क, बिजली परिवहन जैसे बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ रेलवे विस्तार की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में अपराध और नक्सलवाद की समस्या का स्वत: खत्म हो जाना स्वाभाविक है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published.