January 30, 2023

आम बजट: बिहार के शहरों को मिल सकती है संजीवनी, पटना सहित इन जिलों का होगा सुनियोजित विकास, बेहतर होंगी ये सेवाएं

पटना

वर्ष 2022-23 के केंद्रीय बजट में मध्यम और छोटे शहरों के विकास पर जोर दिया गया है। केंद्र सरकार ने देश के टू और थ्री टीयर वाले शहरों के विकास पर फोकस करते हुए बड़ी पहल की है। बिहार को भी इससे काफी फायदा होने की उम्मीद है। राज्य के तमाम शहर इन्हीं दो श्रेणियों में आते हैं। खासकर राजधानी पटना के अलावा टू और थ्री टीयर की श्रेणी में आनेवाले राज्य के कई अन्य शहर के सुनियोजित विकास में इससे मदद मिलेगी।

जिला मुख्यालय से इतर भी शहरों का होगा विकास 

शहरीकरण के लिए बजट में किए गए प्रबंधों का फायदा पटना को मिलेगा। पटना टू टियर वाले शहरों की श्रेणी में आता है, वहीं बिहार के अन्य शहर जो थ्री टियर में आएंगे उसमें प्रमंडलीय और जिला मुख्यालय के अलावा भी कुछ शहर शामिल हो सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से गया, सासाराम, बक्सर, औरंगाबाद, बिहारशरीफ, बेगूसराय, भागलपुर, पूर्णिया, सहरसा, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, बेतिया, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, छपरा, हाजीपुर समेत अन्य जिला मुख्यालय वाले शहरों को भी इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा बड़े नगर परिषद में शामिल डेहरी ऑन सोन और राजगीर भी इस दायरे में आ सकते हैं। आम बजट में टू और थ्री टीयर वाले शहरों को भविष्य के हिसाब से आधुनिक और व्यवस्थित सुविधाओं के साथ विकसित करने की बात कही गई है।

विशेषज्ञों की समिति तैयार करेगी विकास का खाका 

मध्यम और छोटे शहरों के विकास के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। इस समिति में शहर से जुड़े विशेषज्ञ और अर्थशास्त्री भी होंगे। ये शहरों के विकास की रूपरेखा तैयार करने से लेकर संस्थानग विकास की अनुशंसा करेंगे। इसमें न सिर्फ विकास कैसे और किस प्रकार हो, बल्कि उसे जमीन पर कैसे उतारा जाना है, इसकी भी विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे।

देश की आधी आबादी शहरों में होगी

केंद्र सरकार का आकलन है कि वर्ष 2047 जब भारत की आजादी के सौ साल पूरे होंगे उस वक्त तक देश की आधी आबादी शहरों में होगी। इस वजह से ही मध्यम और छोटे शहरों के विकास को लेकर फोकस किया गया है। बड़ी आबादी के शहरों में रहने की सूरत में इन विकास सुनियोजित तरीके से नहीं होने पर कई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में अभी से टू और थ्री टियर वाले शहरों के सुनियोजित विकास को लेकर पहल की गई है। माना जा रहा है कि शहरों में बेहतर यातायात सुगमता, पेयजल, ड्रेनेज और दूसरी मूलभूत सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए।

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