बेकार नहीं जाएगी नदियों की गादः बिहार खुद करेगा प्रबंधन, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में किया जाएगा उपयोग

पटना

दरअसल, गाद के कारण नदियों का पेट पूरी तरह भर गया है। उनकी धारा बदल रही है। नदियों द्वारा अत्यधिक कटाव होने से उत्तर बिहार में बाढ़ की समस्या बढ़ती जा रही है। सिल्ट के कारण नदियों का तल ऊंचा होने से गेज भी सही जलस्तर की जानकारी नहीं दे रहा है। नदी तल लगातार ऊपर बढ़ रहा, जिससे कम पानी में ही नदियों में उफान आ जाता है। यही नहीं नदियां कम पानी में ही खतरे के निशान को पार कर जाती हैं। पिछले दिनों मुख्य सचिव ने गाद की समस्या को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की थी। इसमें सभी विभागों को इससे निपटने के लिए कार्ययोजना बनाने का टास्क भी सौंपा था।

उन्होंने कहा था कि नदियों में जितनी मात्रा में गाद है, पहले उसका आकलन किया जाए और फिर उसके उपयोग का खाका तैयार किया जाए। नदियों में गाद का आकलन करने की जिम्मेवारी जल संसाधन विभाग को सौंपी गयी, जबकि इस रिपोर्ट के आधार पर एसओपी तैयार करने की जिम्मेवारी खान एवं भूतत्व विभाग को दी गयी। इसके पहले पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग पर्यावरणीय अनुमति के संबंध में खान एवं भूतत्व विभाग को जानकारी देगा। उधर, सभी कार्य विभागों के अलावा रेलवे, एनएचएआई अपनी जरूरत के अनुसार गाद की मात्रा का आकलन करेंगे और अपनी जरूरत से खान एवं भूतत्व विभाग को अवगत कराएंगे। इसके बाद विभाग मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करेगा।

उत्तराखंड से मंगाया है प्रारूप

नदियों की गाद के बेहतर उपयोग के लिए उत्तराखंड में भी काम हो रहा है। वहां विभागों के बीच इस समस्या को लेकर वैकल्पिक उपाय किये गये हैं। राज्य सरकार वहां के मॉडल का भी अध्ययन करेगी। उसके आधार पर खान एवं भूतत्व विभाग से समन्वय कर विस्तृत कार्ययोजना बनायी जाएगी।

29 नदियों में सिल्ट की पहचान की गयी है

मुख्य सचिव के निर्देश के बाद जल संसाधन विभाग ने पूरे प्रदेश में नदियों में मौजूद सिल्ट का आकलन शुरू किया। इंजीनियरों की टीम ने विस्तृत सर्वे कर ऐसी 29 नदियों की पहचान की जो सिल्ट के कारण बुरी तरह परेशान हैं। इनमें गंगा, कोसी, बागमती, महानंदा, गंडक, बूढ़ी गंडक, सिकरहना, कमला-बलान, बलान, ललबकिया, धोवा, पंचाने, सकरी, वाया, नून, कदाने, झाझा, मसान, गाद, पंडेई, करताहां, बेगरी, धनौती, तिलावे, तियर, देघौरा, पसाह, परमान, सुरसर नदी शामिल हैं।

क्या कहते हैं मंत्री जी

हमने नदियों में जमी गाद की समस्या से निपटने के लिए अपने स्तर से कार्य योजना बनायी है। यह तात्कालिक उपाय है। इससे गाद को लेकर केन्द्र से हमारी मांग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री कई वर्षों से सिल्ट पॉलिसी के लिए केन्द्र से अनुरोध कर रहे हैं। यदि केन्द्र के स्तर पर इसके लिए कोई नीति बनती है तो सभी राज्यों को लाभ होगा।

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