September 30, 2022

सर्वे रिपोर्ट से खुलासाः बिहार में 69 फीसदी महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर 11 से नीचे, जानें क्या है वजह

मुजफ्फरपुर

बिहार में 69 फीसदी महिलाओं का हीमोग्लोबिन 11 प्वाइंट से नीचे है। इसका खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2021 की रिपोर्ट से हुआ है। पड़ोसी राज्य झारखंड से बिहार की दो फीसदी अधिक महिलाएं खून की कमी की शिकार हैं। झारखंड में 67.4 फीसदी महिलाओं का हीमोग्लोबिन 11 प्वाइंट से नीचे है। मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा आलोक ने बताया कि 60 से 70 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी मिलती है। उनमें सात से आठ प्वाइंट ही खून ही पाया जाता है।

12 से ऊपर हीमोग्लोबिन रहना चाहिए

डॉक्टर कहते हैं कि महिलाओं में 12 से ऊपर हीमोग्लोबिन रहना चाहिए। खून की कमी से महिलाएं हरदम थकान महसूस करती हैं। गर्भवती महिलाओं में खून की कमी से बच्चे के विकास पर भी असर पड़ता है। वर्ष 2020 में फैमिली हेल्थ सर्वे की पहली रिपोर्ट में भी सूबे की 63.6 फीसदी महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर 11 प्वाइंट से कम पाया गया था। सर्वे की पहली रिपोर्ट में बताया गया था कि मुजफ्फरपुर में 64.6 फीसदी महिलाओं में एनिमिया मिला था।

25.6 महिलाओं का वजन भी मानक से कम

सर्वे 2021 की रिपोर्ट बताती है कि सूबे की 25.6 फीसदी महिलाओं का वजन भी मानक से कम है। महिलाओं के वजन का मानक बॉडी मास इंडेक्स से तय होता है। महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स 18.5 से 24.9 तक होना चाहिए। वर्ष 2020 में हुए फैमिली हेल्थ सर्वे की पहली रिपोर्ट में भी सूबे की 25.6 फीसदी महिलाओं का वजन मानक से कम पाया गया था। इस रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर की 25.2 फीसदी महिलाओं का वजन मानक से कम पाया गया था।

19 फीसदी महिलाओं को नहीं मिली आयरन की गोली

वर्ष 2021 में जिले की 19 फीसदी महिलाओं को आयरन की गोली नहीं दी गई। स्वास्थ्य विभाग के एचएमआईएस पोर्टल से इसका खुलासा हुआ है। पीएचसी में आशा और आंगनबाड़ी सेविकाओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे महिलाओं और किशोरियों को आयरन की गोली दें, लेकिन योजना पूरी तरह जमीन पर नहीं उतरी। आयरन की गोली नहीं मिलने से महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी पायी गई।

30 फीसदी बच्चों को ही मिला विटामिन ए

फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक, मुजफ्फरपुर सहित पूरे राज्य में पिछले छह महीने के भीतर सिर्फ 30 फीसदी बच्चों को ही विटामिन की खुराक मिली है। इससे बच्चों में भी खून की समस्या होने का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से  सभी स्कूली बच्चों को विटामिन ए की गोली दी जानी है, लेकिन योजना नहीं चल रही है।

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