October 4, 2022

NH पर 30 दिनों में 20 लोगों ने गंवाई जान: अतिक्रमण से भी हो रहे हादसे, सरकारी आंकड़े और हकीकत में काफी अंतर

पूर्णिया

राष्ट्रीय राजमार्ग 57 पर मौत दौड़ रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग 31 से ज्यादा खतरनाक एनएच 57 होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग 57 के दोनों तरफ सबसे अधिक अतिक्रमण है। इसके अलावा फोरलेन सड़क मार्ग होने की वजह से गाड़ियां अधिक संख्या में आवाजाही करती है । सड़क पर अतिक्रमण रहने का नतीजा यह होता है कि अनियंत्रित गाड़ी जब सड़क दुर्घटना के शिकार होते हैं तो वह ज्यादा घातक बनता है। पिछले एक माह के दौरान 20 लोगों ने अपनी जान गंवायी है।

राष्ट्रीय राजमार्ग 57 पर लगातार हो रहे सड़क हादसों के बावजूद भी इस मामले को लेकर कोई टीम अभी तक गठित नहीं हुई है। महज जनवरी से अप्रैल तक के आंकड़ों पर गौर करें तो दो दर्जन से अधिक लोग काल के गाल में बेवजह समा चुके हैं। अनियंत्रित गाड़यिां अक्सर उल्टा साइड से चलती है। इस वजह से वह आमलोगों के लिए काल साबित होता है ।

रविवार को भी हुए सड़क दुर्घटना में ट्रक उल्टा साइड से ही आनियंत्रित रूप से जा रहा था । ढ़ाई फीट का डिवाइडर को तोड़ते हुए दंपती के ऊपर ही जाकर गिर गया था । उल्टा साइड से गाड़ियों के चलने एवं राष्ट्रीय राजमार्ग 57 के रखरखाव का काम करने वाली कंपनियों के द्वारा एंबुलेंस समेत अन्य बुनियादी सुविधा समय पर नहीं मुहैया करवाए जाने का नतीजा है कि ऐसे सड़क हादसों में मौतों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इस संदर्भ में डीटीओ रामशंकर बतातें हैं कि बढ़ते सड़क दुर्घटना के मद्देनजर कुछ जगहों को चिह्नित किया है। ब्लेक स्पॉट की पहचान कर बोर्ड लगाने की कार्रवाई की जा रही है।

हादसा का मुख्य कारण अतिक्रमण
राष्ट्रीय राजमार्ग के भागलपुर डिवीजन के इंजीनियर गोपाल कृष्ण सहाय बताते हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाले अधिकांश सड़क हादसों की वजह अतिक्रमण ही होता है । जब भी कोई बड़ी-छोटी गाड़ियां सड़क दुर्घटना के शिकार होती है तो वह सड़क के दाएं- बाएं ही जाकर गिरती है । अक्सर अतिक्रमण रहने की वजह से लोग दूर या अन्य जगहों पर गाड़ी लेकर नहीं भाग सकते हैं । जिसका नतीजा होता है कि वह गंभीर सड़क दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं । अक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी सड़क से 30 फीट हटकर निर्माण करने का आग्रह करते हैं।

सरकारी आंकड़े और हकीकत में काफी अंतर
पूर्णिया और अररिया के जिला परिवहन कार्यालय में सरकारी आंकड़े और हकीकत में काफी अंतर है। पूर्णिया जिले में जनवरी से मई तक मात्र सात मृतक के परिजन ने ही सड़क हादसे में शिकार होने के बाद मुआवजा के लिए आवेदन किया है, तो अररिया में इसकी संख्या और भी कम है। वहां पर महज पांच मृतकों के परिजन ने मुआवजा के लिए अररिया जिला परिवहन कार्यालय से संपर्क किया है।

एनएच 57 पर गाड़ियों का रहता अधिक दबाव
इंजीनियर अंबुज कुमार बताते हैं कि एनएच 57 पर गाड़ियों का दबाव एनएच 31 से अधिक है। अक्सर इस सड़क मार्ग पर अतिक्रमण समेत कई ऐसे भी टर्निंग प्वाइंट है जो काफी खतरनाक हैं। अनियंत्रित गाड़ियों को कंट्रोल करने के लिए कोई विशेष गाइडलाइन नहीं है। जिसका नतीजा होता है कि आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही है। वह कहते हैं कि एन एच 31 के बजाय 57 पर अधिक बार दुर्घटना होने के एक दर्जन से अधिक वजह है।

सड़क हादसे में जीजा-साले की मौत
जनवरी माह में सदर थाना क्षेत्र के ही राष्ट्रीय राजमार्ग 57 सीसाबाड़ी चौक के समीप सड़क हादसे में जीजा और साला की एक साथ ही मौत हो गई थी। बताया जाता है कि दोनों की शादी घटना से कुछ माह पूर्व ही हुई थी। दोनों की पत्नी के हाथ का मेहंदी का रंग भी नहीं छूटा था। अक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बेतरतीब तरीके से लगे हुए सड़क पर ट्रक की वजह से भी इस तरह के सड़क हादसे हो रहे हैं । कुछ माह पूर्व सदर थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष मधुरेन्द्र किशोर के नेतृत्व में सड़क पर अतिक्रमण हटाने का अभियान भी चलाया गया था । कुछ दिनों तक तो यह ठीक रहा लेकिन बाद में स्थिति जस की तस हो गई ।

चार की मौत के बाद गमगीन था इलाका
कुछ माह पूर्व सदर थाना क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग 57 सीसाबाड़ी चौक के समीप पर एक साथ चार लोगों की मौत हो गई थी। बाद में बारी-बारी से इलाज के क्रम में दो अन्य लोगों की भी मौत हो गई थी। सभी मृतक अररिया जिला के रानीगंज प्रखंड के अलावा कई अन्य जगहों के रहने वाले थे। वे लोग एक कार से अररिया की तरफ जा रहे थे कि राष्ट्रीय राजमार्ग 57 पर सड़क किनारे लगे ट्रक में जाकर घुस गए थे। इस मामले में भी पूर्णिया के तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी विकास कुमार के नेतृत्व में जांच पड़ताल के लिए एक टीम का गठन किया गया था जो बाद में ठंडे बस्ते में चला गया।

दो सगे भाइयों की हो गई थी मौत
फरवरी माह में अररिया जिला के जीरो माइल के समीप झारखंड के रहने वाले 3 मजदूर की एक साथ मौत हो गई थी। जिनमें दो सगे भाई थे सभी मजदूर पूर्णिया में रहकर काम करता था। किसी काम से अररिया से वापस लौटने के क्रम में तीनों की सड़क हादसे में मौत हो गई थी । बताया जाता है कि एक ही घर के दोनों भाइयों की मौत के बाद घर का चिराग ही समाप्त हो गया था और परिजनों की चीख-चीत्कार से पूरा इलाका गमगीन हो गया था।

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