September 25, 2022

100 प्रतिशत हाजिरी वाले 900 सफाई कर्मियों को ढूंढ रहा नगर निगम, बायोमेट्रिक को अनिवार्य करते ही सामने आई गड़बड़ी; पढ़ें पूरा मामला

पटना

नगर निगम से वेतन उठा रहे आउटसोर्स के करीब 900 सफाई कर्मी पिछले 15 दिनों से गायब हैं। हाजिरी रजिस्टर पर उक्त कर्मियों की सौ फीसदी उपस्थिति रहती थी लेकिन जब से बायोमेट्रिक अटेंडेस को बाध्यकारी किया गया है, तब से उपस्थति 40 फीसदी घट गई है यानी 40 फीसदी सफाई कर्मी बायोमीट्रिक अटेंडेंस लागू होने पर नहीं आ रहे हैं। निगम प्रशासन इसे एक बड़ा गड़बड़झाला मान रहा है।

दरअसल, पटना नगर निगम क्षेत्र के 75 वार्डों में आउटसोर्स के जरिए 2200 सफाई कर्मी कागज पर कार्यरत हैं। कोई एक कर्मी चार से पांच दिनों तक छुट्टी पर जा सकता है लेकिन पिछले 16 मई से करीब 900 आउटसोर्स कर्मी की बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे हैं। निगम सूत्रों के अनुसार जो आउटसोर्स कर्मी बायोमीट्रिक हाजिरी जांच में उपस्थित नहीं हो पाए, उन सभी को एक जून से हटाकर नये सफाई कर्मियों को रखने की योजना है।

सख्ती के बाद सामने आई गड़बड़ी

नगर निगम में पहली बार आउटसोर्स के सफाई कर्मियों को बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज करने को अनिवार्य किया गया है। नगर आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर ने इस संबंध में सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। इस सख्ती के कारण ही इतनी बड़ी संख्या में सफाई कर्मियों के नहीं होने की बात सामने आ रही है। नगर आयुक्त ने निर्देश दिया था कि आउटसोर्स के जरिए जिन कर्मियों को रजिस्टर कराया गया है, उन्हीं का बायोमीट्रिक कराना है। किसी दूसरे को खड़ा नहीं कर सकते हैं। रजिस्टर पर 2200 कमिर्यों की सौ फीसदी उपस्थिति होनी चाहिए।

एजेंसी से मांगा जाएगा स्पष्टीकरण

सूत्रों की मानें तो नगर निगम प्रशासन पूरे मई महीने की बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज कवाएगा। अभी तक की रिपोर्ट से यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि उक्त बायोमीट्रिक के जरिए गायब कर्मी निगम में सशरीर हैं ही नहीं। सूत्रों की मानें तो नगर निगम प्रशासन संबंधित एजेंसी को नोटिस भेजकर कार्रवाई करने के मूड में है। इसकी जांच होगी। साथ ही जवाबदेही भी तय की जाएगी।

जितनी मजदूरों की संख्या है उतने हैं ही नहीं

दरअसल, नगर निगम क्षेत्र में पार्षदों द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि दिन के मजदूर से रात में सफाई करायी जा रही है। इसी के बाद निगम प्रशासन ने बायोमीट्रिक पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी। इसके बाद यह सामने आया है कि जितने मजदूर आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से निगम का पैसा लेते रहे हैं, उतने काम पर आते ही नहीं हैं। निगम प्रशासन का कहना है कि अगर सौ फीसदी कर्मी हैं तो दिन और रात दोनों समय काम कराया जा सकता है। अभी तक रिपोर्ट में 40 फीसदी कर्मियों का अता-पता नहीं चलने पर गड़बड़ी की आशंका है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published.