September 30, 2022

हालमार्क कमेटी सदस्य AIJGF द्वारा भारतीय मानक ब्यूरो को भेजा गया पत्र आज 31 MAY 2022 को

पटना

प्रति,
माननीय-
प्रदत अधिकारी महोदय
कॉमर्स एवम उपभोक्ता मंत्री
भारतीय मानक ब्यूरो
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
उपभोक्ता मामले विभाग,
नई दिल्ली।

विषय-: 20 मई, 2022 को मेल द्वारा साझा किए गए 3 विषय में समीक्षा और सुझाव के अतिरिक्त ज्वेलर्स की अन्य बहुत सी व्यावहारिक कठिनाइयों में सुधार हेतु आवश्यक सुझाव PAGE 4 को जरूर संज्ञान में ले
AIJGF के राष्ट्रीय कमेटी ने देश के सभी प्रदेशों के अध्यक्षों से सलाह कर पत्र लिखा गया बिहार अध्यक्ष अशोक वर्मा सोनार ने भी अपनी राय बिहार के जिलाध्यक्षो से ले कर दिया है

प्रश्न १
कुंदन पोलकी के आभूषणों/कलाकृतियों में आईएस 1417 के प्रावधानों के अनुसार हॉल मार्किंग के दायरे में लाना

समीक्षा

जैसा कि कुंदन जड़ाऊ और पोलकी के आभूषण को आईएएस 1417 के प्रावधान के अनुसार अनिवार्य हाल मार्किंग के दायरे में लाने के व्यवस्था का जो विचार किया जा रहा है उसके ऊपर पुनः समीक्षा करना आवश्यक नहीं है क्योंकि पूर्व के नोटिफिकेशन (जून 2021) में इसे हॉल मार्किंग के दायरे से बाहर कर दिया गया था क्योंकि उपरोक्त आर्टफेक्ट की व्यवस्था बनाते समय बहुत ही जटिल और क्लासिफाइड तरीके से निर्मित होती है भारत की सभ्यता के अनुसार यह हस्तशिल्प का एक उत्कृष्ट निर्माण है आदिकाल से या व्यवस्था सिर्फ और सिर्फ भारत के पास ही है आज विश्व में उपरोक्त आभूषण की मांग अत्यधिक है और यह विदेशी पूंजी को आकर्षित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है इसका घाट या बेस बनाने में १८,२०,२२ कैरेट का सोना प्रयोग होता है उससे कुंदन नही जड़ी जा सकती है कुंदन का २४ ct के साथ ही संभव है साथ ही इसको बनाने में सिल्वर ,बहुमूल्य रत्न माणिक पन्ना नीलम आदि भी प्रयोग में लाए जाते है जो की जेवर के हिसाब से कस्टमाइज किए जाते हैं और जिनका दोबारा प्रयोग संभव नहीं इसलिए इसको गला कर चेक करने में जो बनवाई का नुकसान होगा वो किसी भी मनूफैचर के लिए असहनीय होगा । और कुंदन के प्रयोग के बाद जेवर के कैरेट का निर्धारण हॉलमार्क सेंटर द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले और आभूषण से निकाले जाने वाले कार्नेट को मशीनों द्वारा निर्धारित कैरेट जोकि 14 कैरेट 18 कैरेट 20 कैरेट 22 कैरेट 23 कैरेट और 24 कैरेट के मापदंड में सक्षमता पूर्वक निर्धारित नहीं किया जा सकता है और न ही अलग अलग तरीके स ऐसी स्थिति में भारतीय मानक ब्यूरो के द्वारा निर्धारित केरेटों में इसका मापदंड तय होना संभव है ।

निष्कर्ष
अतः हमारा सरकार से अनुरोध है कि इसे हस्त शिल्प के दायरे में रखते हुए इसे अभी भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा जो उसकी छूट को समाप्त किया जा रहा वो न करे क्योंकि इससे हमारी संस्कृति और सभ्यता से जुड़े हुवे छोटे छोटे कारीगरों का भी हनन होगा जो पीढ़ियों से इस काम को कर रहे है ।

प्रश्न

हॉल मार्किंग को पूरे देश में अनिवार्य रूप से लागू किया जाना

समीक्षा

सरकार द्वारा हॉल मार्किंग की जो व्यवस्था लागू करी गई है उससे निश्चित रूप से कस्टमर के दिमाग में ट्रांसपेरेंसी बड़ी है और हम सभी व्यापारी भाई उस व्यवस्था के साथ हैं इस व्यवस्था को पूरे देश में एक रुप से लागू करने के पहले हमें कुछ बातों में ध्यान देना अति आवश्यक है।
मेमोरेंडम डेट 20 मार्च 2022 जहां पर गवर्नमेंट ने अनिवार्य रूप अनिवार्य रूप से हॉल मार्किंग पूरे देश में लागू करने की बात कही है उस दिन तक 733 जिलों में केवल 288 जिलों में ही हॉलमार्क सेंटर मौजूद जो १ साल पहले 256 जिलों में मौजूद थे इसका मतलब यह है केवल 39 से 40 परसेंट जिलों में ही हॉलमार्क सेंटर मौजूद है
15 जून 2021 को देश भर से 20 मेंबरों की एक कमेटी का गठन हमारे कॉमर्स एवम उपभोक्ता मंत्रीके द्वारा किया गया था जहां इस बात को क्लियर किया गया था कि जिस भी जिले में १ भी हॉलमार्क सेंटर की उपलब्धता नहीं है वहां इस व्यवस्था को लागू नहीं किया जा सकता है क्योंकि अगर कोई व्यापारी किसी दूसरे जिले या शहर से हॉलमार्क कराने के उद्देश्य से अपने सामान को कैरी करता है तो उसकी जान और मॉल की लूट जाने का खतरा बढ़ता है और उसकी ट्रांसपोर्ट की कॉस्ट भी बढ़ जाती है।
आज लगभग 130000 व्यापारी इसमें जिसने हॉलमार्क रजिस्ट्रेशन करा रखा है उसमें भी 70% व्यापारियों को उसकी कंप्लायंस के बारे में नहीं पता है और ना ही उसकी जानकारी करने का कोई भी सुलभ साधन मौजूद है।

निष्कर्ष

जब तक 90% जिलों में कम से कम 1 हॉलमार्क सेंटर की स्थापना ना हो जाए तब तक इस प्रक्रिया को पूरे देश में लागू किया जाना संभव नहीं साथ ही जिन व्यापारियों ने हॉल मार्क का लाइसेंस ले रखा है उनको किसी तरह की ट्रेनिंग प्रोग्राम या तो यूट्यूब के माध्यम से कुछ लाइव सेमिनार रखकर या कुछ मेल में स्पेशल नोटिफिकेशन दे कर हॉल मार्किंग के नियमों से अवगत कराना और उनकी कंप्लायंस को सरल बनाने के लिए जागरूक करना भी अत्यंत जरूरी है ताकि एक दुकानदार भाई दूसरे दुकानदार को इसकी गुणवत्ता के आधार पर लाइसेंस लेने के लिए प्रेरित कर सके और इसके कंप्लायंस का पालन कर सकें।

प्रश्न

यूआईडी में पोर्टल ट्रांसफर की प्रक्रिया को प्रयोग में लाना

समीक्षा

हमारा सराफा व्यापार 3 वर्गों में बटा हुआ है जिसमें सर्वप्रथम कारीगर द्वितीय होल्सेलर और तृतीय रिटेलर आता है और इन सब में स्टॉक रखने का कॉमन मेथड वेट वाइज है HUID की इस प्रक्रिया में जब तक इसे पर pcs वाइज ना रखा जाए तब तक इसको ना तो पोर्टल पर ट्रांसफर करना और ना ही डिटेल बिल करना सुलभ है लगभग 130000 व्यापारियों ने हॉलमार्क का रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है और जिनमें से 70 से 80 परसेंट व्यापारियों के पास ना तो कंप्यूटर की सुविधा है और ना ही कोई परमानेंट अकाउंटेंट है और इनको ऑनलाइन पोर्टल पर मॉल को इश्यू करना भी नहीं आता है
अगर किसी अकाउंटेंट से किसी और अन्य व्यक्ति से इस प्रोसेस को कराना का प्रयास किया जाता है तो उस प्रयास में D ko B या u को O पड़ लेने की स्थिति पर अगर उसकी फीडिंग गलत हो जाती है तो उसको मॉडिफाई करने का भी कोई सलूशन आपके पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है और इस और इस प्रकार की गलतियां दैनिक प्रक्रिया में आम बात है*₹ ।

थोक व्यापारी की दृष्टि से जहा काम प्रॉफिट में ज्यादा टर्नओवर का व्यापार होता है अगर वो १ दिन में 2 kg मॉल सेल करता है और उसमे 300 से 500 यूआईडी हो सकती है जिसकी एंट्री करने में उसका पूरा दिन निकल जाता है और उसका बिलिंग का प्रोसेस पूरा नहीं हो पाता है

जिन व्यवसायियों ने रजिस्ट्रेशन करा कर सरकार की मनो भावना के अनुसार हॉल मार्क निर्मित माल बेचने का प्रयोजन प्रारंभ किया है उन्हें पुनः फिर से उन्हीं तकलीफों का सामना करना होगा जोकि वर्तमान समय में जस की तस बनी हुई है मतलब पोर्टल पर ट्रांसफर करने, उसका हिसाब रखने, उस को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए भारत के खुदरा व्यापारी अभी उतने सक्षम और व्यवस्थित नहीं है कई जगहों पर दुकानदार वर्तमान तकनीकी का जानकार नहीं है कई जगहों पर दुकानदार अन्य दुकानों से माल मंगा कर अपना रोजी रोजगार चलाते हैं यदि इस तरह के पोर्टल को सक्षम बनाते हुए अनिवार्य दायरे में लाया गया तो उन क्षेत्रों में विकट स्थिति पैदा हो जाएगी जिन क्षेत्रों में अभी हाल मार्क सेंटर नहीं है और है भी तो कई कई किलोमीटर दूर है जहां व्यापारी को माल खरीदने के पश्चात एक ही दिन में आभूषण की प्राप्ति होना उसे लेकर वापस अपने क्षेत्र में आना उन छोटे व्यापारियों के लिए संभव नहीं है इस परिस्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों का व्यापार पूरी तरह से समाप्त होकर बड़े शहरों की ओर अग्रसर होगा और पुणे ग्रामीण क्षेत्रों का व्यापार पूरी तरह से नष्ट हो जायेगा

निष्कर्ष

जब तक 80 से 90 परसेंट जिलों में हॉलमार्क सेंटर की स्थापना नहीं हो जाती और सभी व्यापारी पोर्टल पर समान को इश्यू और रिसीव करने की प्रक्रिया नहीं समझ लेते है तब तक Huid का उत्तरदायित्व हॉलमार्क सेंटर तक ही सीमित रखना चाहिए

कुछ अन्य आवश्यक सुझाव

१) बीआईएस केयर के ऐप पर HUID की डिटेल को संक्षिप्त करना
जब कोई कस्टमर बीआईएस केयर केयर पर HUID के डिटेल देखता है तो उसे केवल आइटम का नाम, फोटो, वजन और कैरेट ही दिखाई देना चाहिए ना की होल सेलर का नाम हॉलमार्किंग सेंटर का नाम इत्यादि
केवल उपरोक्त डिटेस के साथ वेरिफाइड HUID या अप्रूव्ड HUID ही आना चाहिए

२) कुछ ऐसे हेल्पलाइन नंबरों का निर्माण होना चाहिए जिसमें HUID की प्रक्रिया संबंधी और कानून संबंधी सभी जानकारियां निशुल्क रूप से किसी भी समय प्राप्त करी जा सके।

३) समय-समय पर अमेंडमेंट की जानकारी कानूनी बदलाव की जानकारी हर रजिस्टर्ड हॉल मार्क व्यापारी को मेल द्वारा यूट्यूब पर चैनल द्वारा या व्हाट्सएप द्वारा अपडेट कराने का हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।

४) जो व्यापारी पोर्टल पर HUID का ट्रांसफर कर रहे हैं अगर उनसे फीडिंग में कोई त्रुटि हो जाती है तो उसे मॉडिफाई करने का ऑप्शन भी पोर्टल पर मिलना चाहिए।

५) HUID की वैद्यता का टाइम फ्रेम भी निर्धारित किया जाना चाहिए

६) HUID की प्रक्रिया की और सुलभ बनाना ताकि हॉलमार्क सेंटर से कम समय के समान प्राप्त ही सके जो अभी २ या ३ दिन में मिलता है

७) उपरोक्त समस्याओं के आधार पर सब व्यवपारियो को २ से ३ साल का समय ट्रेनिंग पीरियड के रूप में लागू ववस्था के साथ दिया जाना चाहिए कोई भी नया परिर्वतन उसके बाद ही किया जाना चाहिए ।

उपरोक्त सभी सुझाव सभी ववपारियो की पीड़ा की आप तक पहुंचने के उद्देश से दिए गए है और हम सब आशा करते है की आप अपने ववापरियो की पीड़ा की समझते हुए उचित निर्णय लेने का प्रयास करेंगे

अशोक वर्मा सोनार
प्रदेश अध्यक्ष
AIJGF

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