October 7, 2022

आयुष्मान योजना के बाद भी राज्य में 85.4 प्रतिशत लोग स्वास्थ्य बीमा से हैं वंचित, जानें क्या है वजह

पटना

स्वास्थ्य बीमा को लेकर फिसड्डी साबित हो रहा है। यहां मात्र 14.6 फीसदी लोगों के पास ही स्वास्थ्य बीमा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) -5 की रिपोर्ट के अनुसार पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में 15.9 फीसदी लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा है। जबकि स्वास्थ्य बीमा का राष्ट्रीय औसत 41 फीसदी है।

नीति आयोग की रिपोर्ट

नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 6.5 करोड़ लोग गरीब बताए गए हैं। बिहार में आयुष्मान भारत योजना जैसी बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद बिहार में गरीबों का एक बड़ा तबका इससे जुड़ नही पाया है। इसके पीछे राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता सबसे बड़ी बाधक है। बिहार में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लाखों गरीब परिवारों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के नि:शुल्क इलाज को लेकर कोई जानकारी नहीं है। बिहार में ऐसे 85.4 फीसदी लोग हैं जिनके पास कोई स्वास्थ्य बीमा नहीं है।

प्राइवेट क्षेत्र के बीमा प्रोडक्ट काफी महंगे हैं

प्राइवेट क्षेत्र की कंपनियों का स्वास्थ्य बीमा प्रोडक्ट काफी महंगा है, जो आमलोगों की क्रय शक्ति के बाहर होते हैं। प्राइवेट कंपनियों के प्रतिनिधि भी इसके बारे में आमलोगों की समझ विकसित नहीं कर रहे है और लोग इसे समझ भी नहीं पा रहे है। आमलोग रोजी-रोटी व बच्चों की शिक्षा को लेकर ही परेशान है, ऐसे में स्वास्थ्य बीमा के किसी प्रोडक्ट के प्रति उनकी रुचि कम है।

स्वास्थ्य बीमा के तहत महंगे जांच भी कराए जा सकते हैं

स्वास्थ्य बीमा के तहत महंगे जांच भी कराए जा सकते हैं। आमलोग रोगों के गंभीर होने तक अमूमन स्वास्थ्य जांच कराने से कतराते हैं, जिसका परिणाम होता है कि रोग के गंभीर होने पर इलाज का खर्च बढ़ जाता है। कई बार मरीज की जीवन रक्षा कर पाना भी मुश्किल होता है।

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