January 28, 2023

सृजन घोटाला: किसके डूबे नौ करोड़ रुपए, चार साल बाद भी पता नहीं; एजी से डीआरडीए ने मांगी फाइनल ऑडिट रिपोर्ट

भागलपुर

सृजन घोटाले के खुलासे के साढ़े चार साल बाद भी जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) को महालेखाकार (एजी) ने फाइनल ऑडिट रिपोर्ट नहीं दी है। डीआरडीए ने एजी से दो बार पहले भी मांग की थी। अब एजी से फिर रिमाइंडर भेजकर ऑडिट रिपोर्ट मांगी जा रही है। दरअसल, डीआरडीए यह जानना चाह रहा है कि 89 करोड़ की अवैध निकासी उनके खाते से हुई या प्रखंडों के खाते से।

डीआरडीए की प्रशासनिक जांच रिपोर्ट में 80 करोड़ की वित्तीय हेराफेरी की बात सामने आई थी। राशि के अंतर को लेकर असमंजस बना हुआ है। डीआरडीए को आशंका है कि प्रखंडों की अवैध निकासी की राशि भी एजी ने जोड़ दी है। ऐसे में 9 करोड़ फिलहाल किसके डूबे हैं, यह एजी से विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही साफ हो सकेगा। उधर, अवैध निकासी की राशि वापसी के लिए भी विभागों ने प्रयास तेज कर दिया है। को-ऑपरेटिव बैंक मनी सूट दायर करने की तैयारी में है। वह ब्याज सहित सौ करोड़ की वापसी की मांग करेगा।

2017 में डीएम की कमेटी ने 80 करोड़ डूबने की दी थी रिपोर्ट

डीआरडीए की आपत्ति है कि 2017 में डीएम की गठित कमेटी ने इंदिरा आवास योजना व अन्य मद में 80 करोड़ का चेक बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक में जमा करने के लिए डाला था। यह राशि डीडीसी, भागलपुर के विभागीय खाते में न जाकर सृजन महिला सहयोग समिति लिमिटेड के खाते में चला गया। लेकिन एजी की आरंभिक रिपोर्ट के मुताबिक दोनों बैंकों ने डीआरडीए के 89 करोड़ सृजन में डाले थे। इसी रिपोर्ट पर सर्टिफिकेट केस कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा को 40 करोड़ 18 लाख 99 हजार 737 रुपये व इंडियन बैंक को 49 करोड़ 64 लाख नौ हजार 674 रुपये डीआरडीए को वापस करने का आदेश दिया था।

जून 2018 में एजी से किसी प्रखंड ने नहीं की थी आपत्ति

जून 2018 में डीआरडीए की आपत्ति के बाद एजी ने सृजन आरोपित विभागों को ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर अपना पक्ष रखने के लिए पटना बुलाया था। महालेखाकार ने सभी विभागों को ऑडिट रिपोर्ट पूर्व में ही भेज दी थी। जिले के सभी प्रखंड सहित 16 विभागों को बुलाया गया था, लेकिन उस समय किसी प्रखंड ने कम राशि गबन की शिकायत नहीं की। इसी वजह से एजी डीआरडीए से मांगी रिपोर्ट का जवाब नहीं दे रहे हैं।

लेनदार व देनदार की भूमिका में बीडीओ व बैंक

डीआरडीए अधिकारियों ने बताया कि प्रखंडों को भेजे गए सभी चेक का जब मिलान किया गया तो पाया गया कि 9 करोड़ रुपये के विभिन्न चेक प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बैंक में डाले थे। इस चेक की राशि भी सृजन में डायवर्ट हो गई। ऐसे में लेनदार व देनदार की भूमिका में बीडीओ व बैंक है। डीआरडीए तो कहीं है नहीं। डीआरडीए ने बैंक में चेक जमा नहीं कराया था, प्रखंडों ने कराया था। फिर वह राशि डीआरडीए के सोर्टेज फंड में क्यों एजी ने डाली है, इस पर आपत्ति की जा रही है। सबौर, नवगछिया, जगदीशपुर, कहलगांव, शाहकुंड, गोराडीह व पीरपैंती प्रखंड कार्यालय से भेजे गए चेक इसमें शामिल हैं।

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