September 29, 2022

बिहार में अब जल्दी सॉल्व होंगे केस, कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त पुलिसकर्मी को दी जाएगी यह जिम्मेदारी; डीजीपी एसके सिंघल ने दिया निर्देश

पटना

बिहार के थानों में लंबित कांडों के निपटारे के लिए अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारियों (आईओ) की संख्या बढ़ाई जाएगी। डीजीपी एसके सिंघल ने संविदा के आधार पर होने वाली नियुक्ति में इसके लिए तेजी लाने को कहा है, ताकि पदाधिकारियों की संख्या बढ़ाई जा सके। उन्होंने अनुसंधान कार्यों की तकनीकी बाधाओं को दूर कर कांडों का निष्पादन तेजी से कराने कराने का निर्देश अपने अफसरों को दिया है।

पुलिस मुख्यालय में शुक्रवार को डीजीपी एसके सिंघल ने थानों का निरीक्षण करने वाले वरीय अधिकारियों के साथ बैठक की। अफसरों ने कांडों के लंबित रहने के पीछे पुलिस अफसरों की कमी, प्रोन्नति में हो रही देरी और तालमेल की कमी को बड़ा कारण बताया। थानों का निरीक्षण करने वाले वरीय पुलिस अफसरों ने बताया कि जिलों व थानों में कांडों के अनुंसधान का काम संतुलित रूप से आवंटित नहीं किया जा रहा।

पुलिस अफसरों ने कहा कि किसी पदाधिकारी के पास ज्यादा संख्या में कांडों के अनुसंधान की जिम्मेदारी है, तो किसी के पास कम कांडों का प्रभार है। अभियोजन पदाधिकारी और अनुसंधानकर्ता के बीच कांडों के त्वरित निष्पादन के लिए जरूरी समन्वय का भी अभाव निरीक्षण के दौरान देखा गया।

प्रोन्नति नहीं होने से पदाधिकारियों की कमी

समीक्षा बैठक के दौरान पाया गया कि प्रोन्नति बाधित होने के चलते राज्य में अनुसंधान करने वाले पुलिस पदाधिकारियों की कमी है। सिपाही कोटि से प्रोन्नति के बाद ही एएसआई के पद भरे जाते हैं। इसी तरह पुलिस अवर निरीक्षक के 50 प्रतिशत पद भी प्रोन्नति से ही भरे जाते हैं। अनुसंधान के अधिकांश मामले इन्हीं दो स्तरों पर होते हैं। प्रोन्नति नहीं होने से काफी पद खाली पड़े हैं। दूसरे हर महीने पदाधिकारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इसे देखते हुए डीजीपी ने संविदा पर नियुक्ति के काम में तेजी लाने और अनुसंधान कार्य के लिए जरूरी तकनीकी दिक्कतों को दूर करने का निर्देश दिया।

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