BPSC पेपर लीक कांडः गिरफ्तार डीएसपी रंजीत रजक पर EOU की कार्रवाई शुरू, इन ठिकानों पर छापेमारी

पटना

बिहार लोक सेवा आयोग, बीपीएससी के पेपर लीक कांड में गिरफ्तार किए गए डीएसपी रंजीत रजक के खिलाफ ईओयू की कार्रवाई शुरू हो गयी है। रंजीत रजक के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी चल रही है। जानकारी के मुताबिक ईओयू की टीम पटना, कटिहार और अररिया में रंजीत के ठिकानों पर रेड कर रही है। दो दिन पहले रंजीत रजक के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का एफआईआर ईओयू ने कांड संख्या 23/22 दर्ज किया था। उसके बाद कोर्ट से कार्रवाई के लिए परमिशन मांगा था। कोर्ट के आदेश पर ईओयू ने कार्रवाई शुरू कर दिया है।

घर से लेकर ससुराल तक छापा

रंजीत के खिलाफ अकूत संपत्ति के सबूत मिलने पर ईओयू ने आगे की कार्रवाई के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी। ईओयू को कोर्ट के आदेश का इंतजार था। हरी झंडी मिलते ही ईओयू ने रंजीत रजक पर शिकंजा कस दिया है। इसके तहत कटिहार के मनिहारी के गांव हंसबर स्थित पैत्रिक मकान में रेड चल रहा है। कटिहार में रंजीत के एक संबंधि के पेट्रोल पंप पर कार्रवाई चल रही है। अररिया के महादेव चौक पर भी ईओयू रंजीत के ससुराल में रेड कर रही है। पटना में रूपसपुर थाना के वीणा विहार स्थित किराय के मकान में आर्थिक अपराध इकाई की टीम रेड कर रही है। बताया जा रहा है कि रंजीत रजक के कई रिलेटिव ईओयू के रडार पर हैं।

प्रश्नपत्र लीक में बीडीओ समेत नौ पर आरोप पत्र

इधर, बीपीएससी की 67वीं प्रारंभिक परीक्षा के पेपर लीक मामले में शुक्रवार को आर्थिक अपराध इकाई ने बीडीओ जयवर्धन गुप्ता समेत नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है।

पटना एसडीजेएम के कोर्ट में दायर चार्जशीट में वीर कुंवर सिंह महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य योगेन्द्र प्रसाद सिंह, सहायक केन्द्र अधीक्षक अगम सहाय, प्रोफेसर सुशील सिंह, बड़हरा के बीडीओ जयवर्धन गुप्ता, कृष्ण मोहन सिंह, राजेश कुमार, सुधीर कुमार, निशिकांत राय और अमित सिंह पर जालसाजी, धोखाधड़ी, फजीवाड़ा, षड्यंत्र, साक्ष्य को गायब करने, आईटी एक्ट और बिहार परीक्षा अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं। सभी नौ आरोपी अभी बेउर जेल में बंद हैं। इस मामले में डीएसपी रंजीत कुमार रजक समेत कुल 17 गिरफ्तारी हो चुकी है। डीएसपी रंजीत पटना में ही बिहार स्पेशल आर्म्ड पुलिस की 14वीं बटालियन में तैनात थे। 8 आरोपियों के खिलाफ फिलहाल अनुसंधान चल रहा है। गौरतलब है कि आठ मई को पेपर लीक हुआ था। इसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी। फिर, पूरे मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई को सौंप दी गई थी। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे गिरफ्तार अभियुक्तों की संख्या भी बढ़ती चली गई।

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