February 7, 2023

बांका: शंभूगंज के सरकारी अस्पताल का हुआ बुरा हाल, हड्डी रोगियों के लिए प्लास्टर करने की नहीं है व्यवस्था

बांका

बांका जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंभूगंज में ऑर्थो विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं रहने से सीएचसी रेफर सेंटर बन गया है। वहीं टूट-फूट के जख्मी रोगियों के लिए प्लास्टर करने की व्यवस्था नहीं रहने से 40 किमी दूर बांका या भागलपुर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जिससे गरीब व्यक्तियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस क्रम में भागलपुर जिले के ऊंचा गांव निवासी पपलू साव की दस वर्षीय बिटिया चांदनी कुमारी अपने गांव में बच्चों के बीच खेल-खेल के दौरान जमीन पर गिरकर जख्मी हो गई।

जख्मी को शंभूगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज कर रहे डॉक्टर आलमगीर आलम ने एक्स-रे की जांच करने पर हाथ टूटने की बात कही। जहां प्राथमिक उपचार कर बेहतर इलाज के लिए बाहर रेफर कर दिया। जिससे आर्थिक अभाव में उक्त गरीब को घोर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा यहां रोजाना इस तरह के मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं इस समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों के अलावा विभागीय पदाधिकारी को अवगत कराया गया। लेकिन अभी तक कोई फायदा नजर नहीं हुआ है।

क्षेत्र के 19 पंचायत में करीब ढाई लाख की आबादी एक सीएचसी पर निर्भर है। जबकि शंभूगंज क्षेत्र से सटे भागलपुर एवं मुंगेर जिले के भी मरीज शंभूगंज अस्पताल पहुंचते हैं। जिसमें उक्त रोगियों की व्यवस्था नहीं रहने से खासकर गरीब लोगों की जेब ढीली हो रही है। बता दें कि शंभूगंज का सरकारी अस्पताल दो वर्ष पूर्व रैंकिंग में बिहार का नंबर वन पीएचसी था। जबकि सीएचसी बनने के बाद रैंकिंग स्थिति पिछड़ गई है। सीएचसी के प्रभारी डाक्टर अजय शर्मा ने बताया कि एमबीबीएस डॉक्टर की कमी का दंश लोग झेल रहे हैं।

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